Analysis of 2 Unseen Hindi Passages Questions

2 अपठित हिंदी गद्यांशों का विवेचन एवं विश्लेषण

420 Practice Questions

Showing 1–20 of 420 questions

विश्व शांति और अहिंसा

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर चुनिए:

धरातल से युद्ध की विभीषिकाओं को सदा-सदा के लिए समाप्त करने के लिए गाँधीजी ने विश्व को अहिंसा रूपी अस्त्र प्रदान किया। गाँधीजी कहा करते थे कि प्रेम और अहिंसा के द्वारा विश्व के कठोर से कठोर हृदय को भी कोमल बनाया जा सकता है। उन्होंने इन सिद्धान्तों का परीक्षण भी किया और वे नितान्त सफल सिद्ध हुए। हिंसा से हिंसा बढ़ती है, घृणा घृणा को जन्म देती है और प्रेम से प्रेम की अभिवृद्धि होती है। अतः यह निश्चित है कि बिना प्रेम और अहिंसा के विश्व में शान्ति स्थापित नहीं हो सकती। शान्ति के अभाव में मानव जाति का विकास सम्भव नहीं। प्रत्येक राष्ट्र का स्वर्णिम-युग वही कहा जाता है, जबकि वहाँ पूर्ण शांति और सुख रहा हो तथा उत्तमोत्तम रचनात्मक कार्य किए जाते हों। भौतिक दृष्टि से व्यापार और कृषि की उन्नति भी शांतिकाल में ही सम्भव होती है, अतः हम यदि विश्व का कल्याण चाहते हैं तो हमें युद्ध का बहिष्कार करना ही होगा। अहिंसा और प्रेम की भावना से विश्व में शान्ति स्थापित करनी होगी, तभी विश्व में सुखमय एवं शांतिमय राज्य की स्थापना सम्भव होगी।

Question 1

विश्व में शांति क्यों आवश्यक है ?

  1. A. मानव जाति के विकास के लिए
  2. B. उत्तमोत्तम रचनात्मक कार्य के लिए
  3. C. व्यापार और कृषि की उन्नति के लिए
  4. D. कठोर से कठोर हृदय को भी कोमल बनाने के लिए

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Question 2

विश्व शांति की स्थापना के लिए सबसे आवश्यक है

  1. A. हिंसा और भय
  2. B. अहिंसा और प्रेम
  3. C. आत्मीयता और समीपता
  4. D. परिश्रम और ज्ञान

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Question 3

कठोर से कठोर हृदय को भी कोमल बनाया जा सकता है

  1. A. सत्य पालन द्वारा
  2. B. मौन पालन द्वारा
  3. C. अहिंसा द्वारा
  4. D. भय द्वारा

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Question 4

किसी भी राष्ट्र के स्वर्णिम-युग के प्रमुख तत्त्व हैं

  1. A. धन और वैभव
  2. B. धन और सम्मान
  3. C. आध्यात्म और उपासना
  4. D. शान्ति, सुख और रचनात्मक कार्य

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Question 5

'नितान्त' शब्द का उपयुक्त पर्याय है

  1. A. भलीभाँति
  2. B. बिलकुल
  3. C. विधिवत्
  4. D. निम्न

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विज्ञान और मानव जीवन

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर चुनिए:

विज्ञान आज के मानव-जीवन का अविभाज्य एवं घनिष्ठ अंग बन गया है। मानव-जीवन का कोई भी क्षेत्र विज्ञान के अश्रुतपूर्व आविष्कारों से अछूता नहीं रहा। इसी से आधुनिक युग विज्ञान का युग कहलाता है। आज विज्ञान ने पुरुष और नारी, साहित्यकार और राजनीतिज्ञ, उद्योगपति और कृषक, पूँजीपति और श्रमिक, चिकित्सक और सैनिक, अभियन्ता और शिक्षक तथा धर्मज्ञ और तत्त्वज्ञ सभी को और सभी क्षेत्रों में किसी न किसी रूप में अपने अप्रतिम प्रदेय से अनुगृहीत किया है। आज समूचा परिवेश विज्ञानमय हो गया है। विज्ञान के चरण गृहिणी के रसोईघर से लेकर बड़ी-बड़ी प्राचीरों वाले भवनों और अट्टालिकाओं में ही दृष्टिगत नहीं होते, प्रत्युत वे स्थल और जल की सीमाओं को लाँघकर अन्तरिक्ष में भी गतिशील हैं। वस्तुतः विज्ञान अद्यतन मानव की सबसे बड़ी शक्ति बन गया है। इसके बल से मनुष्य प्रकृति और प्राणिजगत का शिरोमणि बन सका है। विज्ञान के अनुग्रह से वह सभी प्रकार की सुविधाओं और सम्पदाओं का स्वामित्व प्राप्त कर चुका है। अब वह ऋत-ऋतुओं के प्रकोप से भयाक्रांत एवं संत्रस्त नहीं है। विद्युत ने उसे आलोकित किया है, उष्णता और शीतलता दी है, बटन दबाकर किसी भी कार्य को सम्पन्न करने की ताकत भी दी है। मनोरंजन के विविध साधन उसे सुलभ हैं। यातायात एवं संचार के साधनों के विकास से समय और स्थान की दूरियाँ बहुत कम हो गई हैं और समूचा विश्व एक परिवार-सा लगने लगा है। कृषि और उद्योग के क्षेत्र में उत्पादन की तीव्र वृद्धि होने के कारण आज दुनिया पहले से अधिक धन-धान्य से सम्पन्न है। शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में विज्ञान की देन अभिनन्दनीय है। विज्ञान के सहयोग से मनुष्य धरती और समुद्र के अनेक रहस्य हस्तामलक करके अब अन्तरिक्ष लोक में प्रवेश कर चुका है। सर्वोपरि, विज्ञान ने मनुष्य को बौद्धिक विकास प्रदान किया है और वैज्ञानिक चिन्तन पद्धति दी है। वैज्ञानिक चिन्तन-पद्धति से मनुष्य अन्धविश्वासों और रूढ़ि-परम्पराओं से मुक्त होकर स्वस्थ एवं संतुलित ढंग से सोच-विचार कर सकता है और यथार्थ एवं सम्यक जीवन जी सकता है। इससे मनुष्य के मन को युगों के अन्धविश्वासों, भ्रमपूर्ण और दकियानूसी विचारों, भय और अज्ञानता से मुक्ति मिली है। विज्ञान की यह देन स्तुत्य है। मानव को चाहिए कि वह विज्ञान की इस समग्र देन को रचनात्मक कार्यों में सुनियोजित करे।

Question 6

विज्ञान मानव की सबसे बड़ी शक्ति इसलिए कही गई है क्योंकि इसके बल से मनुष्य

  1. A. विद्युत शक्ति का स्वामी है।
  2. B. प्रकृति और प्राणिजगत का सिरमौर है।
  3. C. सभी भौतिक सुविधाओं से सम्पन्न है।
  4. D. अन्तरिक्ष के क्षेत्र में हस्तक्षेप कर सकता है।

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Question 7

वैज्ञानिक चिन्तन-पद्धति ने मनुष्य का सबसे बड़ा उपकार यह किया है कि उसे मुक्ति मिली है

  1. A. सन्तुलित अनुचिन्तन से
  2. B. पुरानी शिष्ट औपचारिकताओं से
  3. C. भ्रमपूर्ण रूढ़िवादी विचारणा से
  4. D. प्राचीन सांस्कृतिक परम्पराओं से

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Question 8

विश्व के परिवारवत् लगने का प्रमुख कारण है

  1. A. यातायात एवं संचार साधनों का विकास
  2. B. विज्ञान की गतिशील शक्तियाँ
  3. C. विज्ञान की जीवन से घनिष्ठता
  4. D. विश्व-बन्धुत्व की भावना का विकास

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Question 9

'हस्तामलक' शब्द से अभिप्रेत है

  1. A. अस्पष्ट परन्तु सायास बोधगम्य
  2. B. पास में रखे आँवले की तरह
  3. C. हाथी के लिए आँवले की तरह
  4. D. स्पष्ट और अनायास बोधगम्य

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Question 10

'वैज्ञानिक-चिन्तन' पदबंध से आशय है

  1. A. परम्परागत चिन्तन
  2. B. भावात्मक चिन्तन
  3. C. वैज्ञानिकों द्वारा किया गया चिन्तन
  4. D. स्वस्थ एवं सन्तुलित चिन्तन

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स्वतंत्रता संग्राम और जनतंत्र

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर चुनिए:

स्वतंत्रता संग्राम मनुष्य में उत्तम और स्पृहणीय विशेषताएँ पैदा करता है और भारतीय स्वातंत्र्य संग्राम भी इसका अपवाद नहीं है। महात्मा गाँधी के नेतृत्व में यह युद्ध बिना किसी ईर्ष्या-द्वेष तथा खून-खराबे के लड़ा गया था। गाँधीजी इसे सत्याग्रह कहते थे। इसके पीछे उनकी शिक्षा, धार्मिक आस्था तथा अन्य उपलब्धियों का उतना हाथ नहीं था जितना उनके सदाचरण और व्यवहार का। इस स्वातंत्र्य आंदोलन को स्मरण रखने का मुख्य कारण यह है कि यह जनतांत्रिक था अर्थात् इसमें देश के हर वर्ग और जाति के लोग सम्मिलित थे, चाहे वे धनी हों या गरीब, नर हों या नारी हों अथवा विभिन्न संप्रदायों के। इसके साथ ही यह एक धर्मनिरपेक्ष और स्वतंत्रता कर्मियों का संघर्षशील राष्ट्रीय आंदोलन था। स्वतंत्र भारत के नागरिक के रूप में हम आज जनतांत्रिकता और धर्म निरपेक्षता का लाभ उठा रहे हैं। हम सोच नहीं सकते कि इतने बड़े देश में अपना शासन करने के लिए हम अपना प्रतिनिधि नहीं चुन सकते थे या कोई गंदा कानून लागू कर दिया जाता तो हम उसके विरुद्ध आवाज नहीं उठा सकते थे और हम अपनी राय स्वतंत्रतापूर्वक व्यक्त नहीं कर सकते थे।

Question 11

उपर्युक्त गद्यांश में प्रयुक्त 'स्पृहणीय' शब्द का अर्थ

  1. A. प्राप्त करने योग्य
  2. B. प्राप्त की हुई
  3. C. त्याग करने योग्य
  4. D. त्याग की हुई

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Question 12

उपर्युक्त गद्यांश में लेखक ने मुख्य रूप से बताया है

  1. A. आजादी में क्रांतिकारियों की विशेष भूमिका थी।
  2. B. आजादी के संघर्ष में कृषकों का क्या योगदान था।
  3. C. गुलाम देश की दशा कैसी थी।
  4. D. महात्मा गाँधी के नेतृत्व में राष्ट्रीय आंदोलन कैसा था।

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Question 13

उपर्युक्त गद्यांश के लेखक का उद्देश्य क्या था ?

  1. A. धार्मिक आस्थाओं और सद्व्यवहार को बढ़ावा देना।
  2. B. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की विशेषता बताना।
  3. C. अंग्रेजी राज्य के दोष गिनाना।
  4. D. जनतांत्रिकता से हानि बताना।

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Question 14

धर्मनिरपेक्षता से अभिप्राय है

  1. A. सभी धर्मों का आदर
  2. B. धर्म में हस्तक्षेप न करना
  3. C. धर्म की अवज्ञा
  4. D. किसी भी धर्म को न मानना

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Question 15

कैसे माना जाए कि हमारा स्वतंत्रता संग्राम जनतांत्रिक था ?

  1. A. यह महात्मा गाँधी के सद्व्यवहार और सदाचरण का प्रतीक था।
  2. B. इसमें हिन्दू और मुसलमान सम्मिलित हुए थे।
  3. C. यह स्वतंत्रता-प्रेमियों का आंदोलन था।
  4. D. इसमें सभी जातियों, वर्गों, धर्मों के लोगों ने भाग लिया था।

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विज्ञान और मानव शरीर

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर चुनिए:

विधाता-रचित इस सृष्टि का सिरमौर है मनुष्य। उसकी कारीगरी का सर्वोत्तम नमूना। इस मानव को ब्रह्माण्ड का लघु रूप मानकर भारतीय दार्शनिकों ने ‘यत् पिण्डे तत् ब्रह्माण्डे’ की कल्पना की थी। उनकी यह कल्पना मात्र कल्पना नहीं थी, प्रत्युत यथार्थ भी थी क्योंकि मानव-मन में जो विचारणा के रूप में घटित होता है, उसी का कृति रूप ही तो सृष्टि है। मन तो मन, मानव का शरीर भी अप्रतिम है। देखने में इससे भव्य, आकर्षक एवं लावण्यमय रूप सृष्टि में अन्यत्र कहाँ है? अद्भुत एवं अद्वितीय है मानव-सौन्दर्य! साहित्यकारों ने इसके रूप-सौन्दर्य के वर्णन के लिए कितने ही अप्रस्तुतों का विधान किया है और इस सौन्दर्य-राशि से सभी को आप्यायित करने के लिए अनेक काव्य सृष्टियाँ रच डाली हैं। साहित्यशास्त्रियों ने भी इसी मानव की भावनाओं का विवेचन करते हुए अनेक रसों का निरूपण किया है। परन्तु वैज्ञानिक दृष्टि से विचार किया जाए तो मानव-शरीर को एक जटिल यन्त्र से उपमित किया जा सकता है। जिस प्रकार यन्त्र के एक पुर्जे में दोष आ जाने पर सारा यन्त्र गड़बड़ा जाता है, बेकार हो जाता है उसी प्रकार मानव-शरीर के विभिन्न अवयवों में से यदि कोई एक अवयव भी बिगड़ जाता है तो उसका प्रभाव सारे शरीर पर पड़ता है। इतना ही नहीं, गुर्दे जैसे कोमल एवं नाजुक हिस्से के खराब हो जाने से यह गतिशील वपुयन्त्र एकाएक अवरुद्ध हो सकता है, व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है। एक अंग के विकृत होने पर सारा शरीर दण्डित हो, वह कालकवलित हो जाए – यह विचारणीय है। यदि किसी यन्त्र के पुर्जे को बदलकर उसके स्थान पर नया पुर्जा लगाकर यन्त्र को पूर्ववत् सुचारु एवं व्यवस्थित रूप से क्रियाशील बनाया जा सकता है तो शरीर के विकृत अंग के स्थान पर नव्य निरामय अंग लगाकर शरीर को स्वस्थ एवं सामान्य क्यों नहीं बनाया जा सकता? शल्य-चिकित्सकों ने इस दायित्वपूर्ण चुनौती को स्वीकार किया तथा निरन्तर अध्यवसाय पूर्णसाधना के अनन्तर अंग-प्रत्यारोपण के क्षेत्र में सफलता प्राप्त की। अंग-प्रत्यारोपण का उद्देश्य है कि मनुष्य दीर्घायु प्राप्त कर सके। यहाँ यह ध्यातव्य है कि मानव-शरीर हर किसी के अंग को उसी प्रकार स्वीकार नहीं करता, जिस प्रकार हर किसी का रक्त उसे स्वीकार्य नहीं होता। रोगी को रक्त देने से पूर्व रक्त-वर्ग का परीक्षण अत्यावश्यक है, तो अंग-प्रत्यारोपण से पूर्व ऊतक-परीक्षण अनिवार्य है। आज का शल्य-चिकित्सक गुर्दे, यकृत, आँत, फेफड़े और हृदय का प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक कर रहा है। साधन-सम्पन्न चिकित्सालयों में मस्तिष्क के अतिरिक्त शरीर के प्रायः सभी अंगों का प्रत्यारोपण सम्भव हो गया है।

Question 16

मानव को सृष्टि का लघु रूप माना गया है क्योंकि

  1. A. मानव-मन में जो घटित होता है, वही सृष्टि में घटित होता है।
  2. B. मानव सृष्टि का सिरमौर है।
  3. C. मन की शक्ति अपराजेय है।
  4. D. लघु मानव ही विधाता की सच्ची सृष्टि है।

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Question 17

वैज्ञानिक दृष्टि का अपेक्षाकृत अभाव होता है

  1. A. साहित्यकार में
  2. B. साहित्यशास्त्री में
  3. C. शल्य-चिकित्सक में
  4. D. वैज्ञानिक में

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Question 18

मानव शरीर को यन्त्रवत् कहा गया है क्योंकि

  1. A. मानव शरीर दृढ़ माँसपेशियों और अवयवों से निर्मित है।
  2. B. मानव शरीर यन्त्र की भाँति लावण्यमय होता है।
  3. C. अवयव रूपी पुर्जों के विकृत होने से शरीर यन्त्रवत् निष्क्रिय हो जाता है।
  4. D. मानव शरीर विधाता की सृष्टि की अनुपम कृति है।

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Question 19

शल्य-चिकित्सकों द्वारा स्वीकार की गई दायित्वपूर्ण चुनौती थी

  1. A. जीर्ण शरीर के स्थान पर स्वस्थ शरीर देना
  2. B. मानव-शरीर को मृत्यु से बचाना
  3. C. अंग-प्रत्यारोपण द्वारा शरीर को सामान्य बनाना
  4. D. शल्य-चिकित्सा का महत्त्व स्थापित करना

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Question 20

अनुच्छेद में प्रयुक्त 'निरामय' शब्द का पर्याय है

  1. A. सुन्दर
  2. B. स्वस्थ
  3. C. अद्भुत
  4. D. नवीन

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